Thursday, July 25, 2019

गंभीर

गंभीर है सब
आकाश पर बादल गंभीर हैं
अंधकार गंभीर चारों ओर 
रंभाती गाय गंभीर है
गंभीर है शोर
अदालत में नाचे मोर
चीत्कार
हाहाकार
नहीं गंभीर कोई ललकार
यहाँ हो रहा रोज बलात्कार
यहाँ कोई नहीं गंभीर !
बेलगाम सत्ता
फूहड़ मीडिया
लाचार जनता
तांडव करता महाकाल
शीघ्र आएगा धरती पर अकाल
यहाँ नहीं कोई गंभीर
सत्ता के वीर
हैं अधिक अधीर
युद्ध के लिए
शांति के लिए नहीं कोई गंभीर
नज़रुल पूछ रहे हैं -बलो बीर !

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इन्सान नमक हराम होता है!

  नमक तो नमक ही है नमक सागर में भी है और इंसानी देह में भी लेकिन, इंसानी देह और समंदर के नमक में फ़र्क होता है! और मैंने तुम्हारी देह का नमक...