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इस देश में प्रेम निरोधक दस्ते

सागर ने कहा नहीं
नदी से अपनी बेचैनी
देखने वालों ने
लहरों को टूटते देखा
तट पर 
नदी ने कही नही
विरह की पीड़ा
बहती रही लगातर
बांध बना कर रोक दिया
नदी की प्रवाह को मुझे तुमसे मिलने नहीं दिया
अपने ही लोगों ने यह मेरी -तुम्हारी कहानी है
कोई क्या समझेगा
प्रेमियों की व्यथा प्रेम अपराध है उनके लिए
क्यों कि
वे खुद वंचित हैं
प्रेम से .. अब इस देश में
प्रेम निरोधक दस्ते बनने लगे हैं
चलो हम मिलेंगे ऐसी जगह पर
जहाँ चाँद को भी रहेगा इंतज़ार
हमारे मिलन का |

तुमसे बिछड़ गया मैं

Image
इस बार घर से लौटते हुए
ट्रेन रुकी दुर्गापुर स्टेशन के
उसी प्लेटफार्म पर
जिस पर मैंने उस दिन
तुम्हारे आने का  इंतज़ार किया था आज,
मैं अकेला हूँ
सफ़र में ! ख्यालों का  भविष्य नहीं होता
मैंने तुम्हें अपना भविष्य माना था
ख्याल टूटे
मिलकर तुमसे  बिछड़ गया मैं


बहुत बेपरवाह हूँ मैं

रात का सन्नाटा
पसर रहा है
मेरी हड्डियों में बालकनी में खड़ा होकर 
बहुत देर तक देखता रहा
रात के आकाश को
दो नक्षत्र खामोश जड़े हुए हैं
तुम्हारी नाक की नथ की तरह मुझसे उब कर
विदा लेने के कारण को
खोज लिया है मैंने
बहुत बेपरवाह हूँ मैं |
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तुम्हारा कवि सीरिज से

निर्णायक समय पर पक्ष का साफ़ होना जरुरी है

पुरस्कार, चर्चा और नाम के लिए
जीने -मरने वाले
लोगों को
पहचानते हैं आप ? वो उधर भी हैं
इधर भी ! मतलब
वे, वक्त के हिसाब से
बदलते हैं अपना रंग | वे खूब जानते हैं
गलत -सही
सच -झूठ
पर अच्छे बने रहना चाहते हैं
दोनों ओर ऐसे लोगों का पक्ष निर्धारित नहीं
और मुझे लगता है
निर्णायक समय पर
पक्ष का साफ़ होना जरुरी है वो,
जो दोनों ओर है समान रूप में
वो मेरी ओर नहीं है
उनकी चाल मैं समझ चुका हूँ |

मेरी/ तुम्हारी प्रेम कहानी

तुम्हें भुलाने को
सोने की कोशिश
बहुत की
पर रात ने जिद्द नहीं छोड़ी
और मेरी आँखों ने 
रात का पक्ष लिया#मेरी/ तुम्हारी प्रेम कहानी

मेरे मेरे दामन पर लगे हैं

तुम्हारे छोड़े हुए टूथब्रश से
मैं अपने कत्थई दांत
साफ़ करने की कोशिश
करता हूँ हर सुबह दाग मेरे दांत से गहरा
मेरे दामन पर लगे हैं मैं,भावुक होकर लिखता रहा
तुम्हारा कवि! पिट गया
मैं लूट गया
एक तरफ़ा इश्क़ में !

दो नक्षत्र खामोश जड़े हुए हैं

रात का सन्नाटा
पसर रहा है
मेरी हड्डियों में बालकनी में खड़ा होकर 
बहुत देर तक देखता रहा
रात के आकाश को
दो नक्षत्र खामोश जड़े हुए हैं
तुम्हारी नाक की नथ की तरह मुझसे उब कर
विदा लेने के कारण को
खोज लिया है मैंने
बहुत बेपरवाह हूँ मैं |
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तुम्हारा कवि सीरिज से