Wednesday, February 11, 2015

आसान नहीं मिटा देना

वे भूल जाना चाहते थे मुझे
पर कैसे !
इस कठिन प्रश्न से जूझते हुए
सबसे पहले उन्होंने जला डाली मेरी सारी तस्वीरें
फाड़ दिए डायरी के सभी पन्ने
जिनमें लिखा था मेरा नाम
ढक दिया हर उस कोने को
जहाँ मौजूद थे 

मेरे होने का अहसास 

अब उन्हें कुछ -कुछ सफलता का अहसास होने लगा था
फिर आश्वस्त होकर ली उन्होंने लम्बी सांस
और व्यर्थ हो गया सब कुछ !
अचानक
देखा उन्होंने आईना
उनकी आँखों के पानी में
मैं अब भी तैर रहा था !!

बहुत साधारण हूँ

जी , मैं नहीं हूँ किसी बड़े अख़बार का संपादक न ही कोई बड़ा कवि हूँ बहुत साधारण हूँ और बहुत खुश हूँ आईना रोज देखता हूँ ... कविता के नाम पर अ...