Monday, March 26, 2012

क्यों जता रहे हो यह अहसान ?

गाँधी ने पहनी नहीं 
कभी कोई टोपी 
फिर उनके नाम पर 
वे पहना रहे हैं टोपी 

छाप कर नोटों पर 
जता रहे अहसान 
जैसे आये थे बापू 
इस देश में बनकर कोई 
मेहमान .........

हर चुनावी मैदान पर
आती है तुम्हे
उस संत की याद
फिर भूल जाते हो
उन्हें चुनावों के बाद

क्यों जता रहे हो 
यह अहसान ? 

17 comments:

  1. wish to retuen bapu..काश तुम फिर आते बापू

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  2. bapu ke misuse ko lekar aapne pahle bhi ek kavita likhi thi,
    noto'n par bapu muskaye,
    phir harizan kyun aasu bahaye'"

    dono hi kavitaye'n aapki bakhubi darshati hai ki baapu ke naam ka kis tarah se is desh ke khaddidhariyo'n ne istemal kiya , sach hai jab gandhi ji koi topi kabhi pahne nahi ye gandhi topi aayi kahan se ,kuchh nahi bus ye log khaskar congress wale unka naam dekar logo ko topi pahna rah ehain.

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  3. एहसान क्या जताएंगे , सब चाल है

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    1. जी रशिम प्रभा जी , हम जानते हैं पर आवाज़ नहीं उठाते , यही दिक्कत है ...सादर

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  4. बिल्‍कुल सही कहा है आपने ...

    कल 28/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    ... मधुर- मधुर मेरे दीपक जल ...

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  5. बहुत सही लिखा .....

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  6. गहरू बात कही है ... गांधी जी ने बहुत कम ही पहनी है टोपी पर इन नेताओं ने उन्हें भी टोपी पहना दी आज ...

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  7. आभार आप सभी साथियों का .....

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  8. आपने सही कहा .धन्यवाद ..डा.निशा महाराणा जी .

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  9. waah bhai waah...


    kya kho.Ob likhtE ho....

    chaa gayE !

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  10. sda se hi gandhiji ke sath aesa hi hota aaya hae ki jo unke dvara mna kiya gya hamne use aam chalan men dhal diya kyonki vahi saral taha.jo uanke sidhhant haaen unaki dhajjiyan hi to uda rhen .

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  11. बापू अब प्रोडक्ट हैं, राजनीति बाजार।
    झूठ नाचता हो मुखर, सत्य खड़ा लाचार॥

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  12. सटीक बात............
    कैसा एहसान...और किस पर???????

    सार्थक लेखन के लिए बधाई.

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