Wednesday, November 20, 2013

फैक्ट्रियां

जरूरतों की आपूर्ति के लिए 
बनाई गई फैक्ट्रियां,
ये फैक्ट्रियां अब 
बना रही हैं 
बढ़ा रही हैं रोज 
हमारी जरूरतें 

आदमी पहले भी 
बिकता था 
आज भी बिकता है

बहुत साधारण हूँ

जी , मैं नहीं हूँ किसी बड़े अख़बार का संपादक न ही कोई बड़ा कवि हूँ बहुत साधारण हूँ और बहुत खुश हूँ आईना रोज देखता हूँ ... कविता के नाम पर अ...