Friday, December 13, 2013

वो शाम

याद है तुम्हें वो शाम 
जब हम साथ बैठे बरामदे में 
और पी रहे थे चाय एक ही प्याली में बारी -बारी 
मैं भूल नही पाया हूँ 
तुम्हारे स्पर्श को आज तक 

मुझे आज भी याद है 
वो साईकिल की सवारी 
जब तुम बैठती थी अगले हिस्से पर 
और मैं मारता पैडल 
हम पहुँचते युनिवर्सिटी तक
चढाई आने पर जब मेरी
सांसे फूलती
और तुम होती बेचैन
मैं देखता तुम्हारी आँखों में
और पिघल जाता
याद है तुम्हे वो पल ?
नही न ,

जाने दो
यह जरुरी नहीं कि
तुम्हे भी याद रहे
सभी बातें ...
पर यदि कभी लगे कि
खोई हुई यादें चाहिए तुम्हें
ले जाना मुझसे आकर ...
मैंने इन्हें संजोकर रखा है तुम्हारे लिए ..

3 comments:

  1. वाह........
    मगर उसकी यादों पर हक़ तो आपका है...मत देना उसे...
    :-)
    अनु

    ReplyDelete
  2. खूबसूरत अभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  3. yadein dene lene ki chijein hotin to bahut sare log jbrn de chuke hote ek dusre ko

    ReplyDelete

इस नये इतिहास में हमारा स्थान कहाँ होगा

हक़ीकत की जमीन से कट कर हमने आभासी दुनिया में बसेरा बना लिया है हवा में दुर्गंध फैलता जा रहा है हमने सांसों का सौदा कर लिया है जमीन धस ...