Friday, January 8, 2016

कुछ लघु कविताएँ



1. उफ़नती  नदी  का  दर्द

और तुम्हारे आंसूओं ने
बता दिया
उफ़नती नदी का दर्द
-तुम्हारा कवि 

2.कमजोर आदमी का दावा

मेरा यकीन था
या भ्रम
कि करता रहा दावा 
तुम्हें जानने का !
यह भरोसा अपने भीतर छिपे 
उस कमजोर आदमी का दावा था,
जो खुद को जान नहीं पाया
आज तक .......!

3.मेरा वर्ग

चेहरा,
रंग,
और तन के कपड़े 
से तय किया उन्होंने
मेरा वर्ग !
किसी ने
गौर नहीं किया
मेरी भाषा पर !

4.देशद्रोही

और इस तरह 
मैं बन गया गुनाहगार 
कि दोस्ती के नाम पर 
नहीं दिया मैंने 
तुम्हारे गुनाहों में साथ
तुम्हारे
झूठ को नहीं माना
रिश्तों के नाम पर
मैंने वही कहा हर जगह
जो सत्य था मेरे लिए
और अंत में
मैं बन गया
देशद्रोही !



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