Sunday, September 20, 2009

तस्वीर

वो तस्वीर में मुस्कुरा रही थी

उस तस्वीर में

मै भी था उसके साथ

यह उस वक्त की तस्वीर है

जब हम रहते थे साथ -साथ

हँसते थे ,रोते थे

साथ -साथ

अब नही हँसते

अब नही रोते

नही रहते

साथ - साथ

सिर्फ़ उस तस्वीर में

रह गए हैं हम

साथ - साथ

वो खुश थे

मै खुश था

जब दोनों थे

साथ - साथ

वो तस्वीर , जो

गिरी अचानक

मेरी एक फाइल से

जिसे मैंने छुपा रखी थी ज़माने से

उस तस्वीर में उसने

मुझे पकड़ रखा है

वाहों में

कितनी मजबूती से

सिर्फ़ मुझे ही मालूम है

और उसे जिसने

मुझे पकड़ा है उन वाहों में

पता नही फिर कैसे छूटा

मैं उन वाहों से

मालूम नही क्या हुआ

किंतु

सच है

आज भी हम साथ हैं

सिर्फ़ उस तस्वीर में

जो गिरा था कल

जमीन पर

मेरे एक फाइल से .

2 comments:

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