Friday, September 14, 2012

तेल पर खेल जनता झेल

तेल पर खेल 
जनता झेल 
पूंजीपति -सत्ता का 
गजब मेल 
महंगाई का है पेलम -पेल 
बना फिर कार्टून
चला जा जेल
मांगों न कोई बेल (जमानत )
भोजन ,पानी,बिजली
सबका मजा मुफ्त में ले
विरोध में
मानव सृंखला का
बना दे रेल

सरकार आज
बना साहूकार
देश मच गया हाहाकार ..

1 comment:

  1. आज के हालात का जायजा ...
    सही तप्सरा है ...

    ReplyDelete

मुझे सपने में देखना

जब तक मैं लौटा गहरी नींद आ चुकी थी तुम्हें तुम्हारे दिये  जंगली फूल की मीठी खुशबू से भर गया था मेरा कमरा तुम्हारी नींद में कोई ख़लल न ...