Wednesday, September 4, 2013

नही उगा पाये हम कभी अमन के फूल ....

अमन के वास्ते 
हमने बाँट ली 
अपनी -अपनी सरहदें 
पर हर नई सरहद ने जन्म दिया 
एक नई जंग को 
अपने -अपने चमन में 
नही उगा पाये हम 
कभी अमन के फूल ....
और मरते रहें 
अपनी -अपनी मौत .......

5 comments:

  1. पर हर नई सरहद ने जन्म दिया
    एक नई जंग को
    अपने -अपने चमन में
    नही उगा पाये हम
    कभी अमन के फूल ....
    और मरते रहें
    अपनी -अपनी मौत .......

    सच है

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  2. कितने सटीक तरीके से आप पाठक को सत्य से रू-ब-रू कराते हैं! यथार्थ के साथ रचनात्मकता का सत्य!

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  3. आपके ब्लॉग को ब्लॉग संकलक ब्लॉग - चिठ्ठा में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

    नई चिठ्ठी : "ब्लॉग-चिठ्ठा" की नई कोशिश : "हिंदी चिठ्ठाकार" और "तकनिकी कोना"।

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