Tuesday, November 2, 2010

अब ऐसा भी हो सकता है कि

अब ऐसा भी हो सकता है कि
कभी चाँद आये ज़मी पर
और कहे -
जल मत चड़ाओ अब मुझे
किउंकि अब तुम पड़ गए हो
मेरे जल के पीछे
किउन  इतना खर्च करते हो
मेरे जल के लिए
भेज रहे हो लोगों को
मुझ तक पानी की खोज के बहाने
जितना पैसा तुम खर्च करते हो
गरीबों को बाँट दो
किसानों को बाँट दो
वे भूख से मर रहे हैं
यदि मेरे घर में
पानी मिला
मैं खुद ही
वर्षा दूंगा धरती पर
कल तक पूजा करते थे
आज भरोसा तो करो कम से कम

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