Sunday, July 8, 2012

सार्थकता जीवन की



तब होगी
मेरे जीने की सार्थकता
यदि उठा सकूं
आवाज़, तुम्हारे पक्ष में
तुम्हारे ह्क़ के जीत के लिए
वर्ना, व्यर्थ है
यह जीवन जीने के लिए |

सार्थक होगा
यह जीवन,यदि
कह सकूं मैं सच
बेवाकी से
जल्लाद के समक्ष
और मिट जाये
मौत का डर |

4 comments:

  1. पर ये डर मिट सके तब तो बात है ...
    अर्थ लिए बात ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. सही कहा है आपने . शुक्रिया

      Delete

गवाही कौन दें

हत्या हर बार तलवार या बंदूक से नहीं होती हथियारों से जिस्म का खून होता है भावनाओं का क़त्ल फ़रेब से किया जाता है  और पशु फ़रेबी नहीं होता जान...