Saturday, April 1, 2017

शरत बाबु लौट आइये अमीना , गफ़ूर और महेश आपसे सवाल करना चाहते हैं

ओ आमीना के अब्बा
ग़फ़ूर भाई
अच्छा किया तुमने कि
अब तुम उन कट्टर खोखले ब्राह्मणों के गांव में
नहीं रहते 
शरत बाबु ने बहुत अच्छा किया था
कि , तुम्हारे गांव छोड़ने से पहले ही
महेश को तुम्हारे हाथों मरवा दिया था
ब्राह्मणों को तो यही लगा था कि
तुमने एक बैल की निर्मम हत्या की थी
पर सच तो यह था कि
तुमने ब्राह्मणों की गालियों से मरने से
महेश को बचाया था
मुझे तो नन्ही आमीना की आँखों में
अब दिख जाता है
खेलता -मुस्कुराता महेश
आमीना उसे भात का माड़ पिला देती आज भी
पर ग़फ़ूर की झोपड़ी में अनाज का एक दाना नहीं बचा है
आज देश आज़ाद है
दस्तावेज पर तो यही लिखा है
और आजादी के बाद ख़त्म होगी भुखमरी ,
भेदभाव,
और मिलेगा न्याय और अधिकार बिना भेदभाव !
पर ऐसा हो नहीं सका |
शरत बाबु लौट आइये
अमीना , गफ़ूर और महेश
आपसे सवाल करना चाहते हैं।
 ----
मैं ,
आपका एक पाठक
नित्यानंद गायेन

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