Tuesday, March 7, 2017

मेरे मेरे दामन पर लगे हैं

तुम्हारे छोड़े हुए टूथब्रश से
मैं अपने कत्थई दांत
साफ़ करने की कोशिश
करता हूँ हर सुबह
दाग मेरे दांत से गहरा
मेरे दामन पर लगे हैं
मैं,भावुक होकर लिखता रहा
तुम्हारा कवि!
पिट गया
मैं लूट गया
एक तरफ़ा इश्क़ में !

Sunday, March 5, 2017

दो नक्षत्र खामोश जड़े हुए हैं

रात का सन्नाटा
पसर रहा है
मेरी हड्डियों में
बालकनी में खड़ा होकर 
बहुत देर तक देखता रहा
रात के आकाश को
दो नक्षत्र खामोश जड़े हुए हैं
तुम्हारी नाक की नथ की तरह
मुझसे उब कर
विदा लेने के कारण को
खोज लिया है मैंने
बहुत बेपरवाह हूँ मैं |
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तुम्हारा कवि सीरिज से

Saturday, March 4, 2017

मैं बंद कमरे में रोना चाहता हूँ

हत्या
बहुत मामूली बात हो गयी है
मेरे देश में
मेरे कान
यंत्रणापूर्ण चीखों से भर गये हैं
वो चीखें अब
नदी बन
सैलाब लिए
मेरी आँखों से बाहर आने को
बेताब हैं
मैं बंद कमरे में रोना चाहता हूँ
रात भर |
काश, मुझे इस वक्त
सर टिकाने को
मिल जाता
तुम्हारा कंधा
-तुम्हारा कवि सीरिज से


Tuesday, February 28, 2017

अमन के पक्षधर हैं जो

गाँधी शांति के पक्षधर थे
एक उग्र राष्ट्रवादी ने उनकी हत्या कर दी
क्या हुआ था महान मार्टिन लूथर किंग के साथ
याद कीजिये जरा 
4 अप्रैल 1968 को
जब वे अपने होटल के कमरे की बालकनी में खड़े थे ?
उनको भी मार दी गयी थी गोली
आज़ादी के पक्ष जिनका कोई योगदान नहीं
वे केवल हत्या करना जानते हैं
गुरमेहर भी युद्ध के पक्ष में नहीं है
उसने अमन की वकालत की है
उसे भी डरा रहे हैं
आज के नव राष्ट्रवादी !
अमन के पक्षधर डरते नहीं
युद्ध मानवता के पक्ष में नहीं
विनाश का पर्याय है
हर युद्ध
आखिरकार दो महायुद्धों के बाद भी
तमाम शक्तियों को
शांति वार्ता के लिए आना पड़ा था
एक टेबल पर |
किन्तु,
वो याद किसे है ?
युद्धोन्माद अँधा बना देता है
अक्ल से |

Monday, February 27, 2017

बदनामी से डर किसे है

कर्ज़ कुछ बाकी हैं
अभी ज़िंदगी के
वर्ना
अब तक
रुख़सत ले चुकी होती ज़िंदगी
बदनामी से डर किसे है
इश्क़ से खौफ़ लगता है
दुश्मन से नही
अब दोस्त से डर लगता है |

Saturday, February 25, 2017

इस अनजान दुनिया में

अभी -अभी लौटा हूँ
ऑफिस से
रास्ते में ऑटो वाले भैया ने
खैनी बना कर दिया
उन्हें लगा 
मैं भी बिहारी हूँ
वे मोतिहारी के थे |
कितना अच्छा लगता है
जब कोई अनजान
पहली बारी में आपको
अपना समझने लगे
उन्होंने मुझे
मेरी भाषा से पहचाना
मतलब उन्हें बिलकुल पता न चला
कि मैं ,
बिहारी नहीं
बंगाली हूँ |
ऐसे में आप ही बताइए
मैं कैसे कहता उनसे कि
मैं, बिहारी नहीं
बंगाली हूँ
हिंदी में लिखता हूँ !
मेरी भाषा ने
मुझे एक अनजान से दोस्ती करवाई
भाषा उधार की नहीं होती
भाषा,
केवल भाषा होती है
एक पहचान की
जिससे हम खोज लेते हैं
इस अनजान दुनिया में
किसी बिछड़े हुए
अपने को |

तुम्हारा कवि

1.
कब तक लगाते रहोगे
अपनी तस्वीर दीवार पर ?
कभी आईना से भी
कुछ पूछ लेते 
तो अच्छा होता
-तुम्हारा कवि

2.
तुम्हारे संघर्ष की कहानी में
छिपी हुई है
मेरी नई कविता
करीब आओ तो
पढ़ सकता हूँ उसे 
मैं तुम्हारी आखों में।

डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता

  डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता मैं बहुत डरपोक हो गया हूं तुमसे मिलने के बाद तुम्हे जान लेने के बाद ! जबकि जानता हूं मैं डरपोक नहीं हूं...