Thursday, March 23, 2017

इस देश में प्रेम निरोधक दस्ते

सागर ने कहा नहीं
नदी से अपनी बेचैनी
देखने वालों ने
लहरों को टूटते देखा
तट पर 
नदी ने कही नही
विरह की पीड़ा
बहती रही लगातर
बांध बना कर रोक दिया
नदी की प्रवाह को
मुझे तुमसे मिलने नहीं दिया
अपने ही लोगों ने
यह मेरी -तुम्हारी कहानी है
कोई क्या समझेगा
प्रेमियों की व्यथा
प्रेम अपराध है उनके लिए
क्यों कि
वे खुद वंचित हैं
प्रेम से ..
अब इस देश में
प्रेम निरोधक दस्ते बनने लगे हैं
चलो हम मिलेंगे ऐसी जगह पर
जहाँ चाँद को भी रहेगा इंतज़ार
हमारे मिलन का |

No comments:

Post a Comment

पहले ईश्वर नामक प्राणी मरा

पहले मंगल पर पंहुचे फिर चाँद पर बड़े सा पुल राष्ट्र को समर्प्रित हुआ मन की बात का प्रसारण जारी रहा जमीन पर कुछ किसान मारे गये एक बच्ची भ...