Tuesday, February 20, 2018

मैं मजाक का पात्र हूँ

जानता हूँ कि
मैं मजाक का पात्र बन चुका हूँ
इस समय सच कहने वाला हर शख्स 
मज़ाक का पात्र है आपके लिए 
हर भावुक व्यक्ति जो
मेरी तरह बिना किसी चालाकी के कह देता है
अपनी बात
वह मूर्ख है
आपकी नज़रों में
मैं जानता हूँ
मुझे उस वक्त अहसास हो गया था
अपनी नादानी का जब
मैंने तुमसे कह दी थी दिल की बात
और तुम पर कर लिया था भरोसा
लोग हँसते हैं मुझ पर
सोचते हैं पागल है
शायद इस वक्त होश में नहीं है
सही कहते -सोचते हैं लोग
तुम्हें सोचते वक्त कब मैं
होश में रहता हूँ भला ?
पर मुझे याद है कि
मेरा भरोसा टूटा तो है
मैं बदले के लिए दुश्मनों का सहारा नहीं लेता
क्योंकि मैंने दोस्त बनाएं हैं
दुश्मन नहीं
पर अब दोस्तों में भी किसी दोस्त को खोजना
बहुत कठिन है
प्रेम मरता नहीं कभी
बस बदनाम होता है जीवन काल में
और मेरा जीवन कुछ लम्बा हो गया है शायद
तुम्हारे लिए !

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जी , मैं नहीं हूँ किसी बड़े अख़बार का संपादक न ही कोई बड़ा कवि हूँ बहुत साधारण हूँ और बहुत खुश हूँ आईना रोज देखता हूँ ... कविता के नाम पर अ...