Sunday, October 25, 2015
Monday, October 19, 2015
Thursday, October 15, 2015
Tuesday, October 13, 2015
मैं तुमसे प्रेम करना चाहता हूँ
हत्याओं के इस दौर में
मैं तुमसे प्रेम करना चाहता हूँ
जैसे तुम चाहती हो
मतलब जैसे हम दोनों चाहते हैं
किन्तु एक दिक्कत है !
मैं तुमसे प्रेम करना चाहता हूँ
जैसे तुम चाहती हो
मतलब जैसे हम दोनों चाहते हैं
किन्तु एक दिक्कत है !
हम दोनों की चाहतों के बीच
आ जाती हैं
विश्व की सबसे प्राचीन परम्परा,
संस्कृति, और पता नहीं क्या -क्या
आजकल आ रहा है 'आदित्यनाथ', गिरिराज, प्रज्ञा,
रामसेना, बजरंगी...... मौलानाओं की भीड़
खाप तैयार बैठा है पंचायत सजा कर
फांसी के फंदे और बंदूक के साथ
और सबसे आगे हैं ...
हमारे माँ-बाप , बहन का भाई
जो चुपके से करता है प्यार किसी से
बस उसे पसंद नहीं .... किसी और का प्यार करना !
आ जाती हैं
विश्व की सबसे प्राचीन परम्परा,
संस्कृति, और पता नहीं क्या -क्या
आजकल आ रहा है 'आदित्यनाथ', गिरिराज, प्रज्ञा,
रामसेना, बजरंगी...... मौलानाओं की भीड़
खाप तैयार बैठा है पंचायत सजा कर
फांसी के फंदे और बंदूक के साथ
और सबसे आगे हैं ...
हमारे माँ-बाप , बहन का भाई
जो चुपके से करता है प्यार किसी से
बस उसे पसंद नहीं .... किसी और का प्यार करना !
अब बोलो ....मेरी जान
क्या करें ....
प्यार करें
या समझौता !
क्या करें ....
प्यार करें
या समझौता !
Friday, October 9, 2015
क्या तुझे शर्म नहीं आयी !
दनकौर में,
मादरे हिन्द की बेटी को
नग्न किया गया
उस रात फिर
खूब रोए 'नागा बाबा'
बाबा ने मुझसे कहा -
देख रे -बेरोजगार ग्रेजुएट
इसी देश में आया था बुद्ध भटककर
कबीर भी
और फिर आया था
फ़कीर संत गाँधी
आज सभी रोए रात भर
देखने वाले देखते रहे -बे-शर्म
और मैं देता रहा खुद को तस्सली
कि, अब नहीं रहा इस देश में
मेरी गालियाँ भी अब हो चुकी है बेअसर
चल तू बता -
क्या सच में नहीं बदल पाए इस देश को
जिसे - हिन्दोस्तान कहते हैं !
देख , आज भी मादरे हिन्द की बेटी असहाय नग्न घूम रही है
तेरी जमीन पर ....
हिल उठी है मेरी आत्मा
क्या तुझे शर्म नहीं आयी !
या डरता है मरने से !
___________
चित्र : गूगल से साभार
मादरे हिन्द की बेटी को
नग्न किया गया
उस रात फिर
खूब रोए 'नागा बाबा'
बाबा ने मुझसे कहा -
देख रे -बेरोजगार ग्रेजुएट
इसी देश में आया था बुद्ध भटककर
कबीर भी
और फिर आया था
फ़कीर संत गाँधी
आज सभी रोए रात भर
देखने वाले देखते रहे -बे-शर्म
और मैं देता रहा खुद को तस्सली
कि, अब नहीं रहा इस देश में
मेरी गालियाँ भी अब हो चुकी है बेअसर
चल तू बता -
क्या सच में नहीं बदल पाए इस देश को
जिसे - हिन्दोस्तान कहते हैं !
देख , आज भी मादरे हिन्द की बेटी असहाय नग्न घूम रही है
तेरी जमीन पर ....
हिल उठी है मेरी आत्मा
क्या तुझे शर्म नहीं आयी !
या डरता है मरने से !
___________
चित्र : गूगल से साभार
Friday, October 2, 2015
ऐसे समय में जब प्रेम सबसे बड़ा अपराध घोषित हो चुका है
यह हमारे दौर का
सबसे खूंखार समय है
हत्या बहुत मामूली घटना है इनदिनों
ऐसे समय में
जब प्रेम सबसे बड़ा अपराध घोषित हो चुका है
मैं बेखौफ़ होकर
लिख रहा हूँ
प्रेम कविताएँ
तुम्हारे लिए |
----------------------
सबसे खूंखार समय है
हत्या बहुत मामूली घटना है इनदिनों
ऐसे समय में
जब प्रेम सबसे बड़ा अपराध घोषित हो चुका है
मैं बेखौफ़ होकर
लिख रहा हूँ
प्रेम कविताएँ
तुम्हारे लिए |
----------------------
मैं बदनाम होना चाहता हूँ
हाँ, मैं बदनाम होना चाहता हूँ
बहुत ज्यादा,जितना अब तक हूँ
उससे भी ज्यादा,
उन गलियों से भी जियादा
जहाँ गुजार देते हैं कई -कई रात
सभ्य समाज के सभी ठेकेदार
जिनकी आधी रात बीतती हैं
उन्हीं बदनाम गलियों में
बहुत ज्यादा,जितना अब तक हूँ
उससे भी ज्यादा,
उन गलियों से भी जियादा
जहाँ गुजार देते हैं कई -कई रात
सभ्य समाज के सभी ठेकेदार
जिनकी आधी रात बीतती हैं
उन्हीं बदनाम गलियों में
और हाँ सुनो -
मुझे शिकायत तुमसे नहीं
खुद से है ||
मुझे शिकायत तुमसे नहीं
खुद से है ||
Sunday, September 27, 2015
संसद भवन की सीड़ियों पर माथा टेक कर बन सकते हैं आप
तमाम अपराधों के बाद
वे गाएंगे
जन-गण-मन
वंदेमातरम्
और बन कहलाएंगे राष्ट्रवादी
जो कोई बोलेगा
गरीब, आदिवासी, अल्पसंख्यक
और दलितों पर हुए अत्याचारों के बारे में
कहलाएंगे गद्दार
संसद भवन की सीड़ियों पर माथा टेक कर
बन सकते हैं आप
देशभक्त
विदर्भ, कालाहांडी या कोई और हिस्सा देश का
जहाँ रोज मरने को विवश हैं लोग
उनकी बात न करना
बहुत महंगा पड़ेगा तुम्हें
ये देश हमारा नहीं
राष्ट्रवादियों का है
वे गाएंगे
जन-गण-मन
वंदेमातरम्
और बन कहलाएंगे राष्ट्रवादी
जो कोई बोलेगा
गरीब, आदिवासी, अल्पसंख्यक
और दलितों पर हुए अत्याचारों के बारे में
कहलाएंगे गद्दार
संसद भवन की सीड़ियों पर माथा टेक कर
बन सकते हैं आप
देशभक्त
विदर्भ, कालाहांडी या कोई और हिस्सा देश का
जहाँ रोज मरने को विवश हैं लोग
उनकी बात न करना
बहुत महंगा पड़ेगा तुम्हें
ये देश हमारा नहीं
राष्ट्रवादियों का है
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