Monday, April 11, 2011

लिची का पेड़

लिची का पेड़ 
फिर भर गया है फूलों से 
रानी मधुमक्खी आ गई है 
अपनी सेना के साथ 
उनका रस चूसने
और सुंदरवन से 
आ गये हैं
मधु के व्यापारी 
लिची के पेड़ का 
दर-दाम करने 
किन्तु --
मासीमाँ ने मना कर दिया 
इस बार पेड़ बेचने से 
यह कहकर कि--
"आमादेर बडो खोका असछे एबार गरोमेर छुटीते" *
लिची जब पकेगा 
पूरा पेड़ लाल हो उठेगा 
रस भरी  लिचिओं के गुच्छों से //

*( हमारा बड़ा लड़का आ रहा है इसबार गर्मियों में )

2 comments:

  1. haan is baar sahi likhaa tumne. bas ek makkhiyon ka symbol thhoda unthought-out saa lagaa. Flies are part of nature's designs for spreading pollen; trees need honey bees. Flowers are fragrant and colorul to attract those fellers. vyaapaaris, on the other hand .... One other thing: "Yah kahkar ki" is not required really; just place a colon at the end of the previous line, and "yah kah kar ki" is understood. . Keep it tight, mate. Otherwise, this one really rocks. Good work. -- Rakesh.

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