Saturday, April 7, 2012

मुझे माफ़ कर देना सम्राट अशोक



मैंने नहीं पढ़े
तुम्हारे खुदवाए शिलालेख
पर पढा है तुम्हारे बारे में
इतिहास पुस्तकों में
यहाँ तुम्हे लिखा गया है ‘महान’
तुम्हारे बर्बर कारनामों के बाद भी

सत्ता के लिए
तुमने किये
अपने ही भाइयों की हत्या
रक्त से नहलाया
बेकसूर कलिंग को
फिर भी तुम महान हो
इतिहास की किताबों में  

क्या शिलालेख से
माफ़ हो जाते हैं खून ?
अमेरिका का बुश
गुजरात का राजा 
कुछ ऐसा ही सोचते हैं

जघन्य नरमेध के बाद
क्या तुम्हारी तरह
इनमे भी 'उपज' रही है
"सद.........भावना ...

तो क्या आने वाली पीढ़ी
इन्हें ही पाएंगे महान
इतिहास पुस्तकों में ? 

15 comments:

  1. क्या शिलालेख से
    माफ़ हो जाते हैं खून ?
    अमेरिका का बुश
    गुजरात का राजा
    कुछ ऐसा ही सोचते हैं
    इनदिनों वे
    सदभावना का ढोंग कर रहे हैं
    तो क्या आने वाली पीढ़ी
    इन्हें ही पाएंगे महान
    इतिहास पुस्तकों में ? ... प्रासंगिक विरोध और सवाल, बेहतरीन

    ReplyDelete
  2. बहुत आभार रशिम जी ,

    ReplyDelete
  3. सत्ता के लिए
    तुमने किये
    अपने ही भाइयों की हत्या
    रक्त से नहलाया
    बेकसूर कलिंग को
    फिर भी तुम महान हो
    इतिहास की किताबों में

    itihas sach hota hai par use aam logo ke samne laane se pahle usme khoob sara masala parosa jata hai aur wanchit rakha jata hai aawam ko sach se-------

    ReplyDelete
  4. क्या शिलालेख से
    माफ़ हो जाते हैं खून ?
    अमेरिका का बुश
    गुजरात का राजा
    कुछ ऐसा ही सोचते हैं
    इनदिनों वे
    सदभावना का ढोंग कर रहे हैं
    तो क्या आने वाली पीढ़ी
    इन्हें ही पाएंगे महान
    इतिहास पुस्तकों में ?

    aapki ye kavita satta ke us pahloo par sawal uthati hai jise aadat padi sach ko chhupane ki,
    baat bilkul satya bhi hai aakhir kya khoon maaf ho jayenge ,koi aisa-waisa kaam kar dene se. jo bush ,modi ne kya uski saza kya hai.
    bhoot se shuru hui kavita ,vartman ke halaat ko bakhubi pesh karti hai,aur dikh jati hai aaj bhi aise ashok hain

    ReplyDelete
  5. kya likha hai aapne, zabardast, abhi tak k comments se baat saaf hai! Kavita saargarbhit hai, nice writings, congrates!!

    ReplyDelete
  6. Bahut Shukriya Sunitamohan jee, Dheeraj Bhai.....

    ReplyDelete
  7. आभार ऋचा जी .......

    ReplyDelete
  8. Replies
    1. saarthak post, aabhaar.

      padharen mere blog par bhee.

      Delete
  9. http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/04/blog-post_14.html

    ReplyDelete
  10. इतिहास का एक और घिनौना सच....जो जीत गया वही सही है .....वही महान !!!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. मुझे लगता है प्रश्न के रूप में लिखी जाने वाली कविता का भविष्य अब उज्जल होने वाला है ... और इस मामले में आप का जवाब नहीं

      Delete
    2. धन्यवाद बबन भैया

      Delete

मेरा देश रोना चाहता है बहुत जोर से चीख़ कर

मान लीजिये कि कभी आप चीख़ कर रोना चाहते हैं किन्तु रो नहीं सकते ! कैसा लगता है तब ? तकलीफ़ होती है न ? मेरा देश रोना चाहता है बहुत जोर से ...