Tuesday, April 24, 2012

ऐसा नहीं कि


ऐसा नहीं कि

मैं, तुमसे मिलना

नही चाहता अकेले में ,

पर क्या करूँ

हर तरफ भीड़ है बेशुमार




गली का वो कोना

आज ही बिका है

तालाब के किनारे

खड़े हो गए सीमेंट के जंगल

अब यहाँ पंछियों का जोड़ा भी

नही आता कभी




मैं नही डरता

लोगों की कानाफुसी से

बस सहम उठता हूँ कभी –कभी

खाप  पंचायत से

सरकारी जासूसों से

कहीं भर न दे हमें

 सलाखों के पीछे

“राजद्रोह “ के आरोप में ...............

13 comments:

  1. "गली का वो कोना
    आज ही बिका है
    तालाब के किनारे
    खड़े हो गए सीमेंट के जंगल
    अब यहाँ पंछियों का जोड़ा भी
    नही आता कभी"
    आम पीड़ा के साथ ,विचारणीय कविता

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    1. बहुत आभार सर , आज आपकी टिप्पणी पाकर बहुत अच्छा लगा

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  2. गली का वो कोना
    आज ही बिका है
    तालाब के किनारे
    खड़े हो गए सीमेंट के जंगल
    गहनता लिए हुए मन को छूते शब्‍द ...

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    1. शुक्रिया सदा जी ......

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  3. bhayi sahi kaha aaj prem karana hi to sabase bada rajdroh hai.....kavita gahare aashayon ko liye huye hai. bus dhairy se paane ki maang karati hai.

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  4. gahri bhavnaon se likhi gayee kavita

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    1. बहुत आभार आपका सर

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  5. मैं नही डरता

    लोगों की कानाफुसी से

    बस सहम उठता हूँ कभी –कभी

    खाप पंचायत से

    सरकारी जासूसों से

    कहीं भर न दे हमें

    सलाखों के पीछे

    “राजद्रोह “ के आरोप में ...............

    ek kavita me kai bhaw chhupe hote hain, har padhnewala use alag-alag nazaro'n se padhta hai aur use naye-naye bhaw nazar aate hain.
    ye kavita yun to padhte hue lagta hai jaise kisi virah me likhi gayi hai ,sahi bhi kahi-na-kahi mohabbat ki majburi ko bakhubi pesh kiya kiya hai nitya bhai aapne , main salam isliye bhi karta hun kyunki aapne mohabbat ka afsana chheda aur kitne dard insaniyat ke samne aa gaye.
    padhkar lage ki sirf mohabbat ki kavita hai par gahra kataksh bhi samaj ki un pramparao'n jiski saja mohabbat ko di jati hai aise samay me jis samay ko hum loktantrik samay kah rahe hain.

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  6. बस सहम उठता हूँ कभी –कभी

    खाप पंचायत से

    सरकारी जासूसों से

    lajbab prastuti..... badhai sweekaren

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  7. urbanisation is going on full swing... but our mental balance is unbalanced... khap panchayat are doing ... very nasty exercises/ my hindi font is not doing well

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