Saturday, April 21, 2012

नही करना चाहता खुद पर संदेह

हम दोनों के 
बीच की दूरी
यूँ ही बनी रहे 
अपनी सफाई देकर 
नही करना चाहता खुद पर संदेह
न ही करना चाहता हूँ 
तुम्हे शर्मिंदा ....

3 comments:

बहुत साधारण हूँ

जी , मैं नहीं हूँ किसी बड़े अख़बार का संपादक न ही कोई बड़ा कवि हूँ बहुत साधारण हूँ और बहुत खुश हूँ आईना रोज देखता हूँ ... कविता के नाम पर अ...