Wednesday, December 16, 2015

मैं देखना चाहता हूँ मुस्कुराहट तुम्हारे चेहरे पर

मैं सच कह रहा हूँ तुमसे
बहुत शर्मिंदा हूँ अपनी गलतियों पर
मैं देश की सरकार की तरह
बे-शर्म नहीं बना हूँ अभी
इसलिए तो कह रहा हूँ 
कि अब से कोशिश करूँगा
भूल से भी कोई भूल न हों मुझसे
न उदास हो तुम्हारा चेहरा मेरी किसी बात से
मुस्कान रहे चेहरे पर
जो मैं देखना चाहता हूँ हर पल
नहीं कर सकता मैं कोई झूठा वादा तुमसे
अभी मैं सरकार में नहीं हूँ
न ही विपक्ष की किसी पार्टी में
हाँ, मैं तुम्हारे साथ हूँ
यह तो मानना होगा तुम्हें
सुनो मेरे कमरे के फ़र्श पर नहीं है कोई कालीन
ठंड बहुत लगती है पैरों में
श्मशान पास ही है
पर अभी वक्त है मेरे जाने में
और जबतक नही जाता
मैं देखना चाहता हूँ मुस्कुराहट तुम्हारे चेहरे पर
बहुत कुछ किया है तुमने अबतक सबके लिए
मेरे लिए बस मुस्कुरा दो ....

1 comment:

  1. अपनों के चेहरे पर उदासी अपनों को अच्छी नहीं लगती। .
    बहुत सुन्दर

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