Friday, May 5, 2017

आज तुम, मुझे अपने सपने में देखना

जब तक
मैं लौटा,
गहरी नींद आ चुकी थी तुम्हें
जंगली फूल की महक से
भर गया था मेरा कमरा !
तुम्हारी नींद में
कोई ख़लल न पड़े
इसलिए
बड़ी सावधानी से प्रवेश किया
तुम्हारे स्वप्नों की दुनिया में
आज तुम,
मुझे अपने
सपने में देखना |

No comments:

Post a Comment

मेरा देश रोना चाहता है बहुत जोर से चीख़ कर

मान लीजिये कि कभी आप चीख़ कर रोना चाहते हैं किन्तु रो नहीं सकते ! कैसा लगता है तब ? तकलीफ़ होती है न ? मेरा देश रोना चाहता है बहुत जोर से ...