Saturday, May 13, 2017

नदी / मेरी आँखें

नदी ने राह मांगी 
मैंने अपनी आँखें बिछा दी

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वक्त हम पर हँस रहा है

हादसों के इस दौर में जब हमें गंभीर होने की जरूरत है हम लगातर हँस रहे हैं ! हम किस पर हँस रहे हैं क्यों हंस रहे हैं किसी को नहीं पता दरअस...