Wednesday, November 18, 2015

बहुत वीरान समय है

बहुत वीरान समय है
और ऐसे में तुम भी नहीं हो यहाँ
राजा निरंकुश है
बहुत क्रूर है
और मैं लिखना चाहता हूँ
हमारी प्रेम कहानी
तुम कहो -
क्या लिखूं - अंत,
मिलन या मौत !
राजा मौत चाहता है हमारी
और मैं चाहता हूँ मिलन !
राजा रूठे तो रूठे
तुम न रूठना कभी ...
-तुम्हारा कवि


No comments:

Post a Comment

बहुत साधारण हूँ

जी , मैं नहीं हूँ किसी बड़े अख़बार का संपादक न ही कोई बड़ा कवि हूँ बहुत साधारण हूँ और बहुत खुश हूँ आईना रोज देखता हूँ ... कविता के नाम पर अ...