Wednesday, February 22, 2017

मेरा होकर बहुत तनहा रह गया है

दिन भर की तमाम
अराजक घटनाओं को झेल कर
खुद को भरोसा देता था
कमरे पर लौट कर
तुमसे लिपट कर रो सकता हूँ मैं 
तुमने मुझसे विदा मांग ली
और मैं अनाथ हो गया उस दिन
अक्सर अब
कमरे में लौट कर
देखता हूँ बुद्ध की उस तस्वीर को
जिसे तुम्हारी पसंद से
हम साथ खरीद लाये थे
अपने 10 / 12 के कमरे की
खाली दीवार के लिए
बुद्ध की वो तस्वीर
आज भी टंगी हुई है 
मेरे कमरे की दीवार पर
बस अब यह कमरा
हमारा से
मेरा होकर
बहुत तनहा रह गया है

दिन भर जूझता है
अपने अकेलेपन से
मेरी तरह
तुम बताओ
खुश तो हो न
अपने भरे -पूरे घर में
इनदिनों
मुझसे आज़ादी के बाद ?
इस कमरे में
उन 30 दिनों की
यादों के सिवा
कुछ भी नहीं बचा है
मेरे पास |
#तुम्हारा कवि सीरिज से

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