Tuesday, February 14, 2017

ईनाम के बाद बिछड़ जाते हैं लोग

अंग्रेजी कैलेंडर में दर्ज़
'प्रेम दिवस'
भी आज निकल ही गया
जैसे निकल जाता है रोज के दिन
पर कुछ दिन सच में खास होते हैं
या बना दिए जाते हैं
मुझे बहुत ख़ुशी होती है
जब दुनिया में प्रेम की बातें होती हैं
वर्ना रोज -रोज नफ़रत और जंग की बातों ने
जीवन को नरक जैसा बना दिया है
वैसे मैंने न तो स्वर्ग देखा है
न ही नरक
जो कुछ देखा इस धरा पर देखा है
धरती खुबसूरत है
पर प्यार करने वालों ने इसे और भी खुबसूरत बना दिया है
मैंने आज
नहीं लिखी कोई प्रेम कविता
पढ़ता रहा
सोचता रहा
तुम्हारा चेहरा
अलबम को आज निकालकर तस्वीरें पलटता रहा
थियेटर में अंतिम फिल्म
हमने साथ देखी थी
जंगल बुक का
वो शेर खान
मर चुका था उस फिल्म में
उसे मोगली ने मारा था
मानवीय दिमाग के इस्तेमाल से
तुमने कहा था
फिल्म तो बहाना था
बस कुछ पल
हमें साथ रहने का
वो बहाना था
रिक्शे पर लौटते हुए
भरी सड़क पर
मेरे गालों पर तुम्हारा चुम्बन
इस जनम का ईनाम है मेरा
पता नहीं था कि
ईनाम के बाद बिछड़ जाते हैं लोग
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