Friday, August 31, 2012

कमाल हो तुम

बंदूक,
कुपोषण 
दंगे ,आगजनी 
नफ़रत 
इन सबके बीच रहकर भी 
तुम लिख लेते हो 
प्रेम कविता ....?
सच में कमाल हो तुम ....

1 comment:

  1. क्योकि इस सब मे अगर किसी की जरुरत है तो वो प्रेम ही तो है !!

    ReplyDelete

बहुत साधारण हूँ

जी , मैं नहीं हूँ किसी बड़े अख़बार का संपादक न ही कोई बड़ा कवि हूँ बहुत साधारण हूँ और बहुत खुश हूँ आईना रोज देखता हूँ ... कविता के नाम पर अ...