Friday, June 1, 2012

दिल्ली में जब होता है मंथन मूल्य वृद्धि पर


दिल्ली में जब होता है
मंथन मूल्य वृद्धि पर
वे खामोश रहते हैं
ख़ामोशी, समर्थन है
वे शायद भूल जाते हैं
मूल्य वृद्धि के बाद वे हल्ला करते हैं
इसे ही राजनीति कहते हैं 

किया जाता है
बंध का आह्वान
वे भूल जाते हैं
कि मूल्य वृद्धि से ही जीवन
आप ही थम जाता है आम आदमी का
बस थमती नही
लाल बत्ती लगी उनकी गाड़ियां
जो तेल से नही
हमारे खून से चलती है
धर्मघट से घट सकती अगर
बढ़ी हुई दरें
तो बढ़ती क्यों ?

ये पैंतरे पुराने हैं
बस हम ही भूल जाते हैं
और शामिल हो जाते हैं
उनके जुलूसों में ...

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