Saturday, June 9, 2012

गांव छोड़ते हुए लिखी गई कविता




शिखोरबाली (मेरा गांव ) में आज अंतिम दिन है ....

बहुत मुश्किल है 
तुम्हे भूलना 
तुम्हे छोडना '
मेरे साथ जायेगी तुम्हारी 
मिट्टी की खुशबू 
हवा की महक 
चिडियों की चहक 
कच्ची सड़क
मन उदास है
हवा भी बंद है
तुम्हे भी गम है
मेरी आँखें आज नम है ........

No comments:

Post a Comment

मुझे सपने में देखना

जब तक मैं लौटा गहरी नींद आ चुकी थी तुम्हें तुम्हारे दिये  जंगली फूल की मीठी खुशबू से भर गया था मेरा कमरा तुम्हारी नींद में कोई ख़लल न ...