Saturday, June 23, 2012

मौसमी प्रेम

कुछ इस तरह से 
सिकुड़ गया प्रेम 
जैसे ,फागुन-चैत में 
सूखता है ताल का पानी 

मौसमी प्रेम 
अमर नही होता 
मालूम था तुम्हे ,
अब करो फिर सावन का इंतज़ार
क्या पता , फिर 
पनप जाये 
तुम्हारा प्यार ...........

8 comments:

  1. प्रशंसनीय रचना - बधाई

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  2. सशक्त रचना , बधाई.

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    1. धन्यवाद शुक्ल जी

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  3. hmare desh me hr kism ke prem ke liye seasons hain.desh prem/desh bhaqti ka season-15aug,26jan....pti prem ka season karwa ka mousm;;;;;premi yuglo k liye roz day ,kis day,vlntine day,chocolateday, ....mthrz day ..fathrz day ..womnz day...ye wo tmam kism ke prem hai jinka ek prticular mousm hota ,,,uske baad gayab theek aaise jaise mousmi fll or sbjiya....lekin so caled pyar koi pyar jaisa lgne wali ek mhz mnoranjakk cheej matr h....sche pyar ko savn bhado ptjhr aur bahar se koi mtlb nhi h...prem kewl prem h apne sahjtm roop me...

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    1. शुक्रिया अमन जी , आपने सही लिखा है .

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  4. मोएमी प्रेम प्रेम नहीं होता ... दिखावा या वासना होती है ...

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    1. सही कहा आपने नासवा जी , शुक्रिया

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