Monday, June 18, 2012

जारी रहे अनवरत

दहक कर जब 
जल उठे मेरी चिता 
दहक उठे कुछ शोले 
तुम्हारे दिल में भी

मैं चाहता हूँ
विद्रोह की आग
कभी न बुझे
और अमर हो जाये
हमारी क्रांति

जारी रहे अनवरत
आये न जब तक चारों ओर
अमन और शांति ........

8 comments:

  1. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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    1. शुक्रिया बहुत -बहुत सदा जी

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  2. कल 20/06/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    बहुत मुश्किल सा दौर है ये

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    1. इस सम्मान के लिए दिल से आभार फिर से सदा जी

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    1. धन्यवाद माथुर जी

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  4. मैं चाहता हूँ
    विद्रोह की आग
    कभी न बुझे
    और अमर हो जाये
    हमारी क्रांति.

    अमन और शांति के लिये सभी तरह के प्रयोग आजमाए जाने चाहिये.

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    1. शुक्रिया रचना जी .

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