Saturday, June 11, 2011

मामूली बात नहीं

पहले लिखना 
और फिर मिटाना 
आसान काम नहीं 
किन्तु इस कार्य को किया है 
तुमने बड़ी आसानी से 
लिखने और फिर मिटाने की 
यह कला कहाँ से सीखी तुमने ?
तुम्हे भीड़ से छुपाना 
आसान न था 
फिर भी छुपा कर रखा था मैंने तुम्हे 
अपने हृदय में 
और तुमने दिल को ही छेद डाला 
दर्द को छुपाना  आसान नहीं 
आँखों  की  भाषा  
पढने वाले लोग अनेक हैं इस जहाँ में 
जंगल  के सन्नाटे में 
दबे पांव निकल जाना 
मामूली बात नहीं 
और मैं निकल गया 
तुम्हे अहसास भी नहीं हुआ 
यह कमाल है //

9 comments:

  1. भावनाओं को बखूबी लिखा है ..

    ReplyDelete
  2. bahut sahi likhaa Nityanand Bhai aapne.

    ReplyDelete
  3. आप सभी का शुक्रिया

    ReplyDelete
  4. sir kya ho gaya ???
    jo aisi rachnaye man mashtishk me aa gayi kuch hua kya sir???

    ReplyDelete
  5. यह कोई जरुरी नही कि कवि अपनी रचना में जो कुछ कहता हो उसके निजी जीवन पर भी हो , किसी के साथ हो सकता है , बात अनुभूति की है .

    ReplyDelete

इन्सान नमक हराम होता है!

  नमक तो नमक ही है नमक सागर में भी है और इंसानी देह में भी लेकिन, इंसानी देह और समंदर के नमक में फ़र्क होता है! और मैंने तुम्हारी देह का नमक...