Friday, January 28, 2022

तुमसे दूरी जरुरी थी


रो कर हल्का होना चाहता हूँ
जब कभी याद आता है
तुम्हारे साथ बिताए वक्त
मेरी आँखों में
उभर आता है तुम्हारा चेहरा
जबकि, मैं भूलना चाहता हूँ तुम्हें
तुम्हारी याद रुलाती है मुझे
मैं तुम्हारी यादों से
आज़ादी चाहता हूँ
वजह कोई नहीं थी

बस खुद को खोजना चाहता हूँ

तुमसे दूरी जरुरी थी
इसलिए
खुद को गुमा दिया!!

Tuesday, January 25, 2022

शिशिर में भीगे पत्तों की तरह शांत रहना चाहता हूँ

 बहुत छोटी-छोटी बातों पर

खुश होना चाहता हूँ
इसलिए एकांत में और किसी दिन
बारिश में चौराहे पर भीगते हुए
मैं रोना चाहता हूँ ...
दर्द के साझा होने पर
दोस्त जब पूछने लगे
बताओ -
उम्मीद क्या है!
किसी बच्चे की तरह उदासी छा जाती है मन पर
और पता नहीं ठीक इसी तरह
मैंने भी अपनी बातों से कितने लोगों को दी है उदासी,
दिया है अवसाद !
जीवन का अपना गणित है
जिस तरह मादक सुगंध और फूलों के रंग से
बदल जाता है चेहरे का भाव
जिस तरह दर्द में
किसी अपने के स्पर्श से मिलता है करार
ऐसे क्षणों का अब रहता है इंतज़ार
शिशिर में भीगे पत्तों की तरह शांत रहना चाहता हूँ
और सूरज की किरणों की प्रतीक्षा में
गुजरना चाहता हूँ रात ...

डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता

  डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता मैं बहुत डरपोक हो गया हूं तुमसे मिलने के बाद तुम्हे जान लेने के बाद ! जबकि जानता हूं मैं डरपोक नहीं हूं...