Monday, February 15, 2021

मैं प्रेम की परिभाषा नहीं जानता

 रिक्शे पर खुले आकाश के नीचे

तुम्हारा अंतिम चुम्बन
आज भी अंकित है मेरे गाल पर
मैं प्रेम की परिभाषा नहीं जानता
तुम्हारी खुशबू आज भी बाकी है
मेरी सांसों में
फूल सूख गया है
पर मैंने सम्भाल के रखा है
पंखुड़ियों को
गुलाल के लिए

क्रांति की अपनी विरासत होती है

 गिरफ्तारी,

हिरासत,
हत्या
डरे हुए शासक का परिचय है
पाश को याद करो-
और उग आओ
उसके हर किए-धरे पर
एक दिन वो थक जायेगा
और करेगा ख़ुदकुशी
किसी अंधकार भरे कमरे में
क्रांति की अपनी विरासत होती है
एक इतिहास होता है
जिसमें निस्वार्थ कुर्बानियां
अव्वल हैं
घबराओ नहीं
तापमान बढ़ेगा
बर्फ का पिघलना तय है
तब धरती के सीने पर घास उगेंगे
फूल भी खिलेंगे !!

इन्सान नमक हराम होता है!

  नमक तो नमक ही है नमक सागर में भी है और इंसानी देह में भी लेकिन, इंसानी देह और समंदर के नमक में फ़र्क होता है! और मैंने तुम्हारी देह का नमक...