Tuesday, May 15, 2012
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डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता
डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता मैं बहुत डरपोक हो गया हूं तुमसे मिलने के बाद तुम्हे जान लेने के बाद ! जबकि जानता हूं मैं डरपोक नहीं हूं...
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गाँधी ने पहनी नहीं कभी कोई टोपी फिर उनके नाम पर वे पहना रहे हैं टोपी छाप कर नोटों पर जता रहे अहसान जैसे आये थे बापू इस देश मे...
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. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
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किसी को नहीं दिखता जमीन के नीचे उबलते लावा का रंग अब पढ़ते हैं तस्वीर में मेरा चेहरा बढ़ी हुई दाढ़ी और .... कुछ नहीं मने मेरा कवि मर गया है ख...
शहरी मेहमानों के प्रति चिंता जायज है ... पत्थर दिल शहरी इंसान किसी की नहीं सुनते बस बर्बाद करते हैं ..
ReplyDeleteआशा है गाँव में बची हो शुद्धता.......
ReplyDeleteसुंदर भाव,
सादर.
बहुत अच्छी कविता भई . गाँव के प्रति आपका प्रेम और आशंका दोनों ही तारीफ के योग्य है
ReplyDeleteAbhar aap sabhi ka
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