Tuesday, May 15, 2012
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युद्ध की पीड़ा उनसे पूछो ....
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
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. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
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किसी को नहीं दिखता जमीन के नीचे उबलते लावा का रंग अब पढ़ते हैं तस्वीर में मेरा चेहरा बढ़ी हुई दाढ़ी और .... कुछ नहीं मने मेरा कवि मर गया है ख...
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हे गुरुवर मैं, एकलव्य की जाति का हूँ सूद्पुत्र हूँ कर्ण की तरह किन्तु ,मैं नही दे सकता अपना अंगूठा न ही बना सकता हूँ आपकी प्रतिमा पर ,...
शहरी मेहमानों के प्रति चिंता जायज है ... पत्थर दिल शहरी इंसान किसी की नहीं सुनते बस बर्बाद करते हैं ..
ReplyDeleteआशा है गाँव में बची हो शुद्धता.......
ReplyDeleteसुंदर भाव,
सादर.
बहुत अच्छी कविता भई . गाँव के प्रति आपका प्रेम और आशंका दोनों ही तारीफ के योग्य है
ReplyDeleteAbhar aap sabhi ka
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