Tuesday, October 27, 2015

बेचैन थी नदी

नदी पार करते हुए
मैं सोच रहा था तुम्हें
बेचैन थी नदी
और उदास था मैं
उम्मीद है
तुम समझोगी वो अनकही
-तुम्हारा कवि ...
____________
चित्र : गूगल  से साभार 


1 comment:

ऐ मेरी अधूरी कविता

  ज़ार मर गया मर गया हिटलर भी वो भी गया और ये भी जायेगा .. इक़लाब जारी रहेगा .. अमन के आने तक ऐ मेरी अधूरी कविता तुझे पूरा करूँगा इन्कलाब के ...