Thursday, May 5, 2016

सपाट प्रेम कविताएँ

हाँ, मेरी प्रेम कविताएँ 
बहुत सपाट होती है 
आड़ी-तिरछी,
उबड़-खाबड़ तरीके से 
नहीं लिख पाता 
मैं प्रेम को |
मेरी प्रेम कविताएँ मोहताज नहीं
किसी
अलंकार और बनावटी शिल्प के |

4 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "भूली-बिसरी सी गलियाँ - 10 “ , मे आप के ब्लॉग को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. सुन्दर शब्द रचना
    नव बर्ष की शुभकामनाएं
    http://savanxxx.blogspot.in

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