Wednesday, November 13, 2019

राजा खुश है ढह गया एक देश

कवि ने लिखा देश गीत
शौर्य,वीरता
संस्कृति परम्परा और
समृद्ध सभ्यता की गाथा
सैकड़ों बच्चों ने भूख से दम तोड़ दिया एक साथ
उसने एक कविता लिखी फूल पर
एक तितली मर गई
नदी, झरने, पहाड़ खामोश रहे
पर जंगल के पेड़ चीखे
उसने सुना नहीं
वो राष्ट्रगान में सावधान खड़ा था
जंगल कट गया
पहाड़ टूट गया
नदी बंध गई
झरने ...?
गुमशुदा हैं
जंगल गया
पर जंगल के लोग कहां गए ?
सिपाही आये थे
कुछ लाशें मिली खून से भीगी हुई
कवि ने लिखी सिपाहियों की वीरता पर कविता
राजा ने उसे भरे दरबार में पुरस्कार दिया
न्यायालय ने कुछ नहीं कहा
स्कूल तोड़े गए
न्यायाधीश ने माना
भगवान का जन्म हुआ था
मंदिर बनेगा
बहुमत की आस्था के सम्मान में
राजा ने सुनाई तंत्र-मंत्र की कहानी
वैज्ञानिकों ने ताली बजाई
सूर्य को जल चढ़ाए
राजा खुश है
उसका छोड़ा अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा
जीत गया
ढह गया एक देश।

3 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14.11.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3519 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की गरिमा बढ़ाएगी ।

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

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  2. सटीक और बेहद संवेदनशील रचना।

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