Friday, August 17, 2012

शामिल नही एक भी शहीद

इनके पास है 
देश भक्तों की एक लम्बी सूची 
शामिल नही एक भी  शहीद
ये सभी ...
जमीन ,इमारतें , नदी तालाब 
को ही मानते हैं देश 

इनके देश में नही रहते 
हम -तुम जैसे 
आम लोग ..

Saturday, August 11, 2012

तुम्हारे बिखराए शब्दों को

तुम्हारे बिखराए शब्दों को 
समेटकर , लगा दिया है मैंने 
पंक्तियों में डाल कर 
छंद बनाया है |
देखो एक नज़र 
बनी है कोई कविता 
या कोई मिलन गीत ?

यदि होते हम रेल पथ



यदि तुम
और मैं ,
बन जाते रेल पथ
दूरी रहती हमारे बीच
फिर भी , हम साथ –साथ चलते
मंजिल तक

हमारे सीने पर 
जब गुजरती
भारी –भारी गाड़ियां
हम साथ –साथ कांपते
पर , चलते साथ –साथ
मंजिल तक दर्द के अनुभवों के साथ

कोई कर्मचारी
आकर लगा जाता ग्रीस
हमारे जोड़ों पर
जंग से बचाने को हमें
हम साथ –साथ चलते
मंजिल तक ......||

Sunday, August 5, 2012

यशगान , अपने –अपने होने का

वे, जो गा रहे हैं 
यशगान , अपने –अपने होने का 
आर्य महान 
डूबे हए हैं घृणित कृत से 
सर से पांव तक |

ऊँची है इनके
कुँए की दीवारें

ये सभी
उबाल कर खाते हैं
दलित का, गरीब के हिस्से का अनाज |

रात के ..
कुकर्म के बाद
अर्घदान करते हैं रवि को
आकाश का सूरज मुस्कुराता है
इनकी बुद्धि पर
कभी –कभी मैं भी .....||

Saturday, August 4, 2012

साज़िस की जड़ें


बड़ी ज़हरीली होती हैं
साज़िस की जड़ें
बड़ी तेजी से फैल रही हैं , ये जड़ें
हमारे भीतर
हमारे खून में घुल कर
रूप बदल –बदल कर
कभी टी.वी. के रास्ते
कभी भोजन से होकर
फैशन के बहाने
कभी कपड़ों में लिपट कर
बाज़ार के रास्ते से
घुस चुकी हैं ,
हमारे समाज में
हम देख रहे हैं
चौखट पर खड़े , निहत्था 
असहाय योध्या की तरह .....

Thursday, August 2, 2012

मैं, बनकर एक माली संवार रहा हूँ तुम्हें .....

मैं रोज देखता हूँ सपना 
तुम्हारे लिए 
तुम सब मुस्कुरा रहे हो 
फूलों की तरह 
धरती के इस गुलिस्तां में 
और मैं, बनकर एक माली
संवार रहा हूँ तुम्हें .....

हे नन्हे फरिश्तों 
तोड़कर सब भेद 
तुम आना मेरे इस
सपनों के बगीचे में
करना साकार मेरे निष्पाप स्वप्न को
और ले जाना
अपने –अपने हिस्से की
मीठी –मीठी मुस्कान

Monday, July 30, 2012

मैं खोज रहा हूँ ,कविता

वे खोज रहे हैं 
कविता में शिल्प और सौंदर्य 

मैं खोज रहा हूँ ,कविता
किसान के खेत में 
मजदूर के पसीने में
बच्चों की हंसी में
उजड़ चुके जंगल में
सूख चुकी नदी में

सभी जगह मिली मुझे
शिल्पहीन कविता
सौंदर्य के नाम पर
मिली मुझे सिर्फ गहरी वेदना ...

युद्ध की पीड़ा उनसे पूछो ....

. 1.   मैं युद्ध का  समर्थक नहीं हूं  लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी  और अन्याय के खिलाफ हो  युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो  जनांदोलन से...