तुम्हारी बेरुखी से
शिकवा नहीं मुझे
तुम्हारे मायूस चेहरे से
गमज़दा हूँ मैं /
कोई चाहत नहीं
कि मिले मुझे
तुम्हारी मुहब्बत में पनाह
सिर्फ मैं
तुम्हारी खुशियों की
आज़ादी चाहता हूँ
गम की कैद से /
डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता मैं बहुत डरपोक हो गया हूं तुमसे मिलने के बाद तुम्हे जान लेने के बाद ! जबकि जानता हूं मैं डरपोक नहीं हूं...
nice poem. When you find true love, you want his/her happiness without any return.
ReplyDeleteTHANKS.
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