पर हर नई सरहद ने जन्म दिया एक नई जंग को अपने -अपने चमन में नही उगा पाये हम कभी अमन के फूल ....और मरते रहें अपनी -अपनी मौत .......सच है
आभार वंदना जी
कितने सटीक तरीके से आप पाठक को सत्य से रू-ब-रू कराते हैं! यथार्थ के साथ रचनात्मकता का सत्य!
आभार
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
पर हर नई सरहद ने जन्म दिया
ReplyDeleteएक नई जंग को
अपने -अपने चमन में
नही उगा पाये हम
कभी अमन के फूल ....
और मरते रहें
अपनी -अपनी मौत .......
सच है
आभार वंदना जी
Deleteकितने सटीक तरीके से आप पाठक को सत्य से रू-ब-रू कराते हैं! यथार्थ के साथ रचनात्मकता का सत्य!
ReplyDeleteआभार
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