Tuesday, March 27, 2018

गली की दीवारों पर बाकी रह जाते हैं खून के धब्बे

अक्सर दंगों के बाद
सभी दोषी निर्दोष पाये जाते हैं
बस शहर की सड़कों और
गली की दीवारों पर बाकी रह जाते हैं
खून के धब्बे 
जले हुए घरों की अस्थियाँ
और राख में छिपी हुई चिंगारी
सन्नाटे में खो जाती हैं
मासूम चीखें
आग जो लगाई गई है
धर्म के नाम पर
उस पर हांडी चढ़ा कर
इंसानी गोश्त पका रहे हैं नरभक्षी
गंगा किनारे सहमा हुआ है नगर-मोहल्ला
न्याय की देवी आँखों पर पट्टी बांध कर सो गई है
आसमान पर फैल गए हैं
धुंए के बादल
सब कुछ जल जाने के बाद
शहर में अब कर्फ्यू लगा है !

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