Monday, March 5, 2018

वह चाहता है हर जुबां पर अपना नाम और जयगान

अन्याय
और क्रूर बर्बरताओं की कहानियां
जो हमने किताबों में पढ़ी थी
अब देख रहे हैं
तानाशाही सत्ता उन्माद पर है 
रातोंरात कर लेना चाहता है
सब कुछ अपने नाम
दीवार पर लिखे हर सवाल को मिटा देना चाहता है
बंद कर देना चाहता है हर जुबान को
जो सवाल करती है
सत्ता पर होने के बाद भी
बहुत डरा हुआ है वह
नगर के हर नुक्कड़ और चौराहे पर
बना देना चाहता है अपनी मूर्ति
वह चाहता है हर जुबां पर अपना नाम और जयगान
दरअसल तानाशाह एक डरा हुआ व्यक्ति है
अकसर वह अपनी परछाई से भी डर जाता है
और उसे भी मिटा देना चाहता है
इसलिए वह अंधकार फैलाता है
अकेले में वह चीखते हुए अपने कान बंद कर लेता है
हार कर वह रोना तो चाहता है अक्सर
किन्तु उसकी आँखों में पानी नहीं है

1 comment:

  1. तानाशाह डरा हुआ व्यक्ति ही होता है . बढ़िया कविता भाई .

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