सपनों का क्या है
उन्हें तो बनना और बिखरना है
मेरी फ़िक्र इंसानों की है |
कहीं तो बची रहे आँखों में
इक बूंद इंसानियत
विनाश के हाथों से |
डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता मैं बहुत डरपोक हो गया हूं तुमसे मिलने के बाद तुम्हे जान लेने के बाद ! जबकि जानता हूं मैं डरपोक नहीं हूं...
सुंदर सृजन
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