Friday, January 24, 2014
Friday, December 13, 2013
वो शाम
याद है तुम्हें वो शाम
जब हम साथ बैठे बरामदे में
और पी रहे थे चाय एक ही प्याली में बारी -बारी
मैं भूल नही पाया हूँ
तुम्हारे स्पर्श को आज तक
मुझे आज भी याद है
वो साईकिल की सवारी
जब तुम बैठती थी अगले हिस्से पर
और मैं मारता पैडल
हम पहुँचते युनिवर्सिटी तक
चढाई आने पर जब मेरी
सांसे फूलती
और तुम होती बेचैन
मैं देखता तुम्हारी आँखों में
और पिघल जाता
याद है तुम्हे वो पल ?
नही न ,
जाने दो
यह जरुरी नहीं कि
तुम्हे भी याद रहे
सभी बातें ...
पर यदि कभी लगे कि
खोई हुई यादें चाहिए तुम्हें
ले जाना मुझसे आकर ...
मैंने इन्हें संजोकर रखा है तुम्हारे लिए ..
जब हम साथ बैठे बरामदे में
और पी रहे थे चाय एक ही प्याली में बारी -बारी
मैं भूल नही पाया हूँ
तुम्हारे स्पर्श को आज तक
मुझे आज भी याद है
वो साईकिल की सवारी
जब तुम बैठती थी अगले हिस्से पर
और मैं मारता पैडल
हम पहुँचते युनिवर्सिटी तक
चढाई आने पर जब मेरी
सांसे फूलती
और तुम होती बेचैन
मैं देखता तुम्हारी आँखों में
और पिघल जाता
याद है तुम्हे वो पल ?
नही न ,
जाने दो
यह जरुरी नहीं कि
तुम्हे भी याद रहे
सभी बातें ...
पर यदि कभी लगे कि
खोई हुई यादें चाहिए तुम्हें
ले जाना मुझसे आकर ...
मैंने इन्हें संजोकर रखा है तुम्हारे लिए ..
Wednesday, November 20, 2013
फैक्ट्रियां
जरूरतों की आपूर्ति के लिए
बनाई गई फैक्ट्रियां,
ये फैक्ट्रियां अब
बना रही हैं
बढ़ा रही हैं रोज
हमारी जरूरतें
आदमी पहले भी
बिकता था
आज भी बिकता है
बनाई गई फैक्ट्रियां,
ये फैक्ट्रियां अब
बना रही हैं
बढ़ा रही हैं रोज
हमारी जरूरतें
आदमी पहले भी
बिकता था
आज भी बिकता है
Friday, October 25, 2013
उस तत्व की खोज
रात भर तेज बारिश के बाद
सुबह धुले -उजले पत्तों को देखना
बड़ा सुखद होता है
तब सोचता हूँ
कि , पिछली बार
जिन लाखों लोगों किया था
संगम पर गंगा स्नान
क्या इन पत्तों सा चमकता है
उनका मन और विचार ?
पर्णहरित या क्लोरोफिल नामक जो तत्व
मौजूद है इन पत्तों में
बनाते हैं जीवन भर
भोजन वृक्ष के लिए
हममें वह कौनसा तत्व है
जो उकसाता है हमें
दूसरों का भोजन छीनने के लिए ?
सुबह धुले -उजले पत्तों को देखना
बड़ा सुखद होता है
तब सोचता हूँ
कि , पिछली बार
जिन लाखों लोगों किया था
संगम पर गंगा स्नान
क्या इन पत्तों सा चमकता है
उनका मन और विचार ?
पर्णहरित या क्लोरोफिल नामक जो तत्व
मौजूद है इन पत्तों में
बनाते हैं जीवन भर
भोजन वृक्ष के लिए
हममें वह कौनसा तत्व है
जो उकसाता है हमें
दूसरों का भोजन छीनने के लिए ?
Thursday, September 26, 2013
दोस्ती और दुश्मनी के बीच
दोस्ती और दुश्मनी के बीच
बचा हुआ रहता है
एक रिश्ता, किन्तु
अभी तक हम खोज नही पाए हैं
कोई मुकम्मल नाम इसका
यकीनन हम सभी तलाशते रहते
हैं
मिठास और कडवाहट से परे
कुछ क्षणों
के लिए शिथिल पड़ चुके
रिश्ते के लिए
रिश्ते के लिए
एक मकबूल नाम
जिससे कर सके संबोधन
एक –दूजे को
हम मनुष्य हैं
और हमारी सबसे बड़ी कमजोरी
है
कि हम अलग नही कर पाते
अपने अहं को
हमारी अपेक्षा हमेशा
दूसरों से ही होती है
और इसी तरह बनी रहतीं हैं
दरारें
रिश्तों में
जिसे भर नही पाता
कोई भी सीमेंट
Wednesday, September 4, 2013
Sunday, August 11, 2013
खोजता हूँ एक जंगल
धम्म स्स्स SSSS....
भूस्म ....भौं ..भौं
गर्र... गर्रर .......
हूस्स ...धत्त ....
जी हाँ ,इनदिनों
कुछ ऐसी ही भाषा में
बात कर रहे हैं मेरे समाज में लोग
आपकी तरह
मैं भी सुनता हूँ
पर उस समय मैं
खोजता हूँ एक जंगल
अपने आसपास
मैं कुछ जानवर खोजता हूँ
मन करता है
जंगल में जाकर खींचू उनकी कुछ तस्वीरें
तस्वीर खींचते हुए मुझे देख
वे समझ लेंगे
मैं आया हूँ
इक्कीसवीं सदी की इंसानी जंगल से |
भूस्म ....भौं ..भौं
गर्र... गर्रर .......
हूस्स ...धत्त ....
जी हाँ ,इनदिनों
कुछ ऐसी ही भाषा में
बात कर रहे हैं मेरे समाज में लोग
आपकी तरह
मैं भी सुनता हूँ
पर उस समय मैं
खोजता हूँ एक जंगल
अपने आसपास
मैं कुछ जानवर खोजता हूँ
मन करता है
जंगल में जाकर खींचू उनकी कुछ तस्वीरें
तस्वीर खींचते हुए मुझे देख
वे समझ लेंगे
मैं आया हूँ
इक्कीसवीं सदी की इंसानी जंगल से |
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युद्ध की पीड़ा उनसे पूछो ....
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
-
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किसी को नहीं दिखता जमीन के नीचे उबलते लावा का रंग अब पढ़ते हैं तस्वीर में मेरा चेहरा बढ़ी हुई दाढ़ी और .... कुछ नहीं मने मेरा कवि मर गया है ख...
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गाँधी ने पहनी नहीं कभी कोई टोपी फिर उनके नाम पर वे पहना रहे हैं टोपी छाप कर नोटों पर जता रहे अहसान जैसे आये थे बापू इस देश मे...


