बदन जलाती गर्मी में
तनिक बैठो
इस वृक्ष की छाव में
अब सुनो
पीपल के पत्तों की
खुसुर - पुसुर
क्या सुना तुमने ?
बातचीत या गीत ?
वृक्ष ही तो है
हमारे सच्चे मित्र ।
बैठे रहो यों ही
समय जाएगा बीत
दोनों की है यही रीत
हम मारते हैं
और
वृक्ष हमे बचाते हैं ।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
युद्ध की पीड़ा उनसे पूछो ....
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
-
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
-
किसी को नहीं दिखता जमीन के नीचे उबलते लावा का रंग अब पढ़ते हैं तस्वीर में मेरा चेहरा बढ़ी हुई दाढ़ी और .... कुछ नहीं मने मेरा कवि मर गया है ख...
-
नमक तो नमक ही है नमक सागर में भी है और इंसानी देह में भी लेकिन, इंसानी देह और समंदर के नमक में फ़र्क होता है! और मैंने तुम्हारी देह का नमक...
वृक्ष मित्र क्यों है ...इसकी सरल शब्दों में व्यख्या
ReplyDelete