Thursday, August 26, 2010

तीन छोटी कवितायेँ

एक
रेडियो पर लव गुरु
और --
टीवी पर बाबा
अपनी -अपनी दुकान खोलकर
कान और नाक पकड़ कर
निकल रहे हैं लोगों की हवा .
रेडियो लव गुरु अध्यापन  नही करता
सिखाता है लव
सोचता हूं जनता को
अक्ल आयेगी कब ?
लवगुरु के बातों का फंदा
कर देता है प्यार ठंडा
इसी को कहते हैं ---
चालाक बंदा
प्रेम क्या रेडियो की चीज़ है ?
किउन करते हो नीलाम
जब तुम में प्रेम नही बसता
लव गुरु किस काम ?
प्रेम यदि सीखना है
तो जानो --
मीरा - कबीर को
प्रेम आप- ही बहेगा
दिल से मिटा दो जो नफरत को  /
______________________
दो

भारत के समाचार चैनेलो पर
दिखते हैं  अब भूत
और -
संवाददाता घुमते हैं
बनकर उनके दूत .
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तीन

सब बन रहे हैं बाबा
तुम भी हो जाओ बाबा
पायोगे लोगों की झूठी  वाह - वाह
तुम भी बन जाओ गुरु
कर लो नया व्यापार शुरू
नाम तुम्हारा क्या है ?
आशा या निराशा
देव ,देवा या कोई अंशु हो नाम के पीछे
आसन बिछाकर बैठ जाओ
ऊपर हो या नीचे
बस तुम एक काम करना
महाराज या राम जोड़ना
अपने नाम के आगे .







1 comment:

  1. भारत के समाचार चैनेलो पर
    दिखते हैं अब भूत
    और -
    संवाददाता घुमते हैं
    बनकर उनके दूत ...

    जबरदस्त व्यंग है .... मज़ा आ गया ...

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