जांच का आदेश दे दिया गया
किसी पर आंच न आने पाए
यह भी कह दिया गया .
खाद्य मूल्य जब बढ रहे थे
बित्त मंत्री शेयर बाज़ार के आंकड़े गिन रहे थे
कृषि मंत्री क्रिकेट के लिए पैसे जुटा रहे थे
किसान खेतों में मर रहे थे .
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किसानो के प्रति सहानभूति मेरे विचार से माँ सेवा ही है ....आप ऐसा ही कर रहे है ...लिखते रहे
ReplyDeletedhanyvaad baban jee
ReplyDeletekisano ke prati apani sahanubhuti bahut sundar shabdo me vyakt ki hai aapne. hamare Bhumihar ki vyatha ko bahut achhe se jana hai aapne.
ReplyDeleteहां, यह आपकी संवेदना ही है जो खेतों में मर रहे किसानों के बीच जाकर रोती है और जंगल के शेरों के लौटने पर गीदड़ों की गत सोचकर हंसती है... मानवीय संवेदना का यह विस्तार ही कविता की आत्मा है... अच्छी अभिव्यक्ति...
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