Sunday, August 14, 2011

आज़ादी की ६५वीं वर्षगांठ की मुबारक बात


सोम से शुक्रवार तक 
जो चिपके रहते थे कम्पुटर से 
सजाते थे आंकड़े 
अमेरिका के लिए 
आज आंकड़ो का अमेरिका 
धरासाई है 
और वे खोज रहे हैं नई नौकरियां 
और --
उधर दिल्ली के 
लालकिले पर चड़कर
भारत के भाग्य विधाता 
दे रहे हैं भाषण ---
राष्ट्र मंडल खेल से लेकर 
मुंबई आदर्श कांड तक 
इस पारी की 
उपलब्धियां है 
और जो मारे गए हैं 
फर्जी पुलिसिया मुठभेड़ में 
रेल दुर्घटना में 
मुंबई ब्लास्ट में 
कर्ज के बोझ से 
बाढ में 
भूख मरी से 
उन सबको दे रहे हैं 
मुबारक बात  
आज़ादी की ६५वीं वर्षगांठ की //
-- 


2 comments:

  1. यही विड़ंबना है पर कोई बात नहीं जब रात घोर अंधेरी हो जाती है तो सुबह आने वाली होती है।

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